तनावपूर्ण होते संबंध

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कनाडा में खालिस्तान समर्थक तत्वों की बढ़ती गतिविधियों के कारण भारत तथा कनाडा के संबंध तनावपूर्ण हो रहे हैं। भारत ने खालिस्तान समर्थक एक अलगाववादी नेता हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के तार संभवत: भारत से जुड़े होने के कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के आरोपों को बेतुका बताते हुए मंगलवार को खारिज कर दिया।

वास्तव में कनाडा में हिंसा के किसी भी कृत्य में भारत सरकार की संलिप्तता के आरोप बेतुके और स्वार्थ से प्रेरित हैं। ये आरोप खालिस्तानी आतंकवादियों और चरमपंथियों से ध्यान हटाने की कोशिश हैं जो कनाडा में आश्रय पा रहे हैं और भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के लिए खतरा बने हुए हैं। इस मामले को लेकर एक भारतीय अधिकारी को कनाडा द्वारा निष्कासित किए जाने के बाद एक वरिष्ठ कनाडाई राजनयिक को भारत से निष्कासित कर करारा जवाब दिया गया है।

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भारत ने जुलाई में भी कनाडा के उच्चायुक्त को तलब किया था और कनाडा में खालिस्तान समर्थकों की बढ़ती गतिविधियों पर आपत्ति जताने वाला पत्र जारी किया था। गौरतलब है कि दिल्ली में आयोजित जी20 शिखर सम्मेलन से इतर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उनके कनाडाई समकक्ष ट्रूडो के बीच 10 सितंबर को द्विपक्षीय बातचीत हुई थी। 

प्रधानमंत्री मोदी ने ट्रूडो को कनाडा में चरमपंथी तत्वों द्वारा जारी भारत विरोधी गतिविधियों को लेकर भारत की चिंताओं से अवगत कराया था क्योंकि ये तत्व अलगाववाद को बढ़ावा दे रहे हैं और भारतीय राजनयिकों के खिलाफ हिंसा भड़का रहे हैं तथा वहां भारतीय समुदाय को डरा रहे हैं। इसके बाद ट्रूडो ने सोमवार को कनाडा की संसद में कहा था कि कनाडा की विभिन्न सुरक्षा एजेंसी कनाडाई नागरिक हरदीप सिंह निज्जर की हत्या और भारत सरकार के एजेंट के बीच संभावित संबंधों के पुख्ता आरोपों की जांच कर रही है। हत्या, मानव तस्करी और संगठित अपराध सहित कई अन्य अवैध गतिविधियों के लिए कनाडा में जगह मुहैया कराया जाना कोई नई बात नहीं है।

पंजाब के जालंधर जिले का रहने वाला हरदीप सिंह निज्जर कनाडा के सिख संगठन सिख फॉर जस्टिस और खालिस्तानी टाइगर फोर्स का प्रमुख था। हरदीप सिंह निज्जर पिछले कई सालों से कनाडा में रह रहा था। कनाडा में बैठकर वो भारत के खिलाफ देश विरोधी गतिविधियों को अंजाम दे रहा था। भारत के लिए ऐसे मामलों में लेकर कनाडा सरकार की निष्क्रियता चिंता का विषय है। जानकारों के मुताबिक भारत विरोधी तत्वों के खिलाफ कार्रवाई में कनाडा की ढील के चलते दोनों देशों के संबंध फिलहाल सामान्य होने की उम्मीद करना बेमानी होगा।

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