Haldwani Crime: बनभूलपुरा दंगे के दूसरे दिन मिली लाश का राजफाश, दोस्तों का भाई बना और बहनों की अस्मत से खेलता रहा

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हल्द्वानी: 25 साल का नवजौवान प्रकाश बातों का धनी और बातों-बातों में पहले दोस्ती और फिर दोस्त के घर तक पहुंच जाने में माहिर था। ऐसा ही उसने अपने पहले दोस्त के साथ किया और उसकी बहन की असमत लूटी। फिर यही काम उसने अपने दोस्त के दोस्त यानी सिपाही के साले के साथ किया। साले के जरिये प्रकाश, सिपाही के घर तक पहुंचा और फिर सिपाही की पत्नी को भी झांसे में ले लिया। पहले अवैध संबंध और फिर ब्लैकमेलिंग के खेल के अंत प्रकाश की हत्या हुआ। 

दंगे की अगली सुबह 9 फरवरी को बनभूलपुरा थाना क्षेत्र के आंवला चौकी गेट गौला बाईपास रोड पर छिने गांव भोजपुर सिन्हा बिहार निवासी प्रकाश कुमार सिंह उर्फ अविराज पुत्र श्याम देव सिंह की लाश मिली थी। वो 7 फरवरी को बिहार से निकला और 8 फरवरी को हल्द्वानी पहुंचा था। उसकी कनपटी में तीन गोलियां मारी गईं थी।

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इस मामले में चोरगलिया थाने तैनात सिपाही, उसके दोस्त, साला और साले के दोस्त को हत्या में इस्तेमाल असलहे के साथ गिरफ्तार किया गया है। बताया गया, प्रकाश करीब तीन साल से सितारगंज में रहकर दिहाड़ी पर काम करता था। प्रकाश पहले सिपाही के एक साले के संपर्क में आया। उससे अच्छी दोस्ती की और घर आना-जाना शुरू हो गया।

आने-जाने में प्रकाश ने दोस्त की बहन को मीठी बातों से प्यार में फंसा लिया और शारीरिक संबंध बनाए। इस दोस्त के जरिये उसकी मुलाकात सिपाही के साले से हुई। इसे भी पहले की तरह प्रकाश ने अपना बड़ा भाई बना लिया। प्रकाश सिपाही के साले से मिलता तो पैर छूता और ऐसे ही भरोसा जीत कर वह साले की बहन यानी सिपाही के घर तक पहुंच गया। 

सिपाही की पत्नी भी प्रकाश के प्यार जाल में फंस गई। प्रकाश ने सिपाही की पत्नी संग अंतरंग संबंध और वीडियो बना लिए। वह बिहार वापस गया तो वीडियो के बूते सिपाही की पत्नी से पैसों की मांग करने लगा। डर कर सिपाही की पत्नी ने पैसे देने शुरू किए तो फिर ये सिलसिला रुका नहीं। ब्लैकमेल होकर थकी सिपाही की पत्नी ने सारा राज पति के सामने उगल दिया। सिपाही के साले को यह बात पता लगी तो वह और आग बबूला हो गया।

तीनों ने मिलकर प्रकाश के हत्या की कहानी गढ़ी। सिपाही ने अपने और साले से अपने उस दोस्त को हत्या की साजिश में शामिल किया, जिसकी बहन को भी प्रकाश ने नहीं छोड़ा था। सिपाही के कहने पर पत्नी ने प्रकाश को फोन किया और कहा, वह उससे शादी करना चाहती है। इस ललक में वो मंगलसूत्र लेकर पहुंचा था, जो घटनास्थल पर जामातलाशी में उसकी जेब से मिला। यहां पहुंचने पर उसके सिर में तीन गोलियां दाग दी गईं। दंगे की रात 11 बजे यह वारदात हुई। दंगे की रात दंगा स्थल के पास घटना को इस लिए अंजाम दिया गया, ताकि यही माना जाएगा कि मौत दंगे में हुई। 

काम आया मोबाइल सर्विलांस, अहम सुबूत आलाकत्ल बरामद
हल्द्वानी : इस घटना में मोबाइल सर्विलांस का अहम रोल रहा। सर्विलांस टीम ने प्रकाश के मोबाइल की सीडीआर खंगाली तो घटना से कई दिन पहले से लगातार कुछ नंबरों पर कॉल की बात सामने आई। नंबर खंगाले गए तो गिरफ्त में आए सिपाही और अन्य आरोपियों के नाम सामने आ गए। हिरासत लेकर इनसे कड़ी पूछताछ हुई तो सारा राज उगल दिया। जिसके बाद आरोपियों की निशानदेही पर हत्या में इस्तेमाल असलहा भी बरामद कर लिया गया, जो हत्याकांड में आरोपियों के खिलाफ अहम सुबूत है। 

हत्याकांड में एक आरोपी इंद्रानगर का, निकाला दंगे का गुस्सा
हल्द्वानी : प्रकाश हत्याकांड में पांच से चार आरोपी ऊधमसिंहनगर जिले के हैं, लेकिन एक इंद्रानगर बनभूलपुरा का है। दंगे के दिन जिले के हर थाने का सारा फोर्स बनभूलपुरा बुला लिया गया। हत्या के आरोपी सिपाही के लिए भी यही आदेश थे। माना जा रहा है कि इसी दंगे का सिपाही ने फायदा उठाया और इंद्रानगर में ही रहने वाले एक दोस्त का फायदा उठाया। उसे भी हत्याकांड में शामिल किया और आंवला चौकी गेट के पास गोली मारकर लाश वहीं फेंक दी। सिपाही ने दोस्त के गुस्से का भी इस्तेमाल किया।  

नजदीक से गोली मारकर फंस गए हत्यारे, फूट गया भांडा
हल्द्वानी : दंगे में जब गोलियां चलती हैं तो निशाना लगाकर कोई नहीं मारता। दनादन गोलियां चलती हैं और यहां-वहां लगती रहती हैं। कोई भी जिस्म से सटाकर एक के बाद एक तीन गोलियां नहीं मारता, लेकिन प्रकाश के मामले में ऐसा नहीं था। प्रकाश के सिर में सटाकर पीछे से तीन गोलियां मारी गईं और यही पुलिस को अखर गया। इसे पुलिस ने हत्या माना और जांच बनभुलपुरा थानाध्यक्ष नीरज भाकुनी को सौंपी। पड़ताल जैसे-जैसे आगे बढ़ी तो हत्याकांड की कडियां खुलने लगीं।  

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