Varanasi: अजय राय की बढ़ी मुश्किलें, 8 साल पुराने मामले में चलेगा मुकदमा, 81 अन्य बरी

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वाराणसी। वाराणसी में 2015 में अन्याय प्रतिकार यात्रा में बवाल में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और सतुआ बाबा समेत अन्य 81 आरोपी बुधवार को बरी हो गए। वहीं, 82वें आरोपी यूपी कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय के खिलाफ केस चलता रहेगा। यह फैसला MP/MLA कोर्ट के विशेष न्यायाधीश अवनीश गौतम ने दिया।

कोर्ट में यूपी सरकार की ओर से हलफनामा दाखिल कर मुकदमे से इन 81 लोगों के नाम वापसी की अपील की गई थी, जिस पर कोर्ट ने अपनी सहमति जताई। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) विनय कुमार ने सरकार का पक्ष रखा। विशेष न्यायाधीश MP/MLA कोर्ट अवनीश गौतम ने अपने आदेश में कहा कि सरकार ने अजय राय के आपराधिक इतिहास का हवाला दिया है। साथ ही मुकदमा वापस न लेने का फैसला किया है। अजय राय पर इस केस के अलावा अन्य मामले भी विचाराधीन रहेंगे ।

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सबसे पहले पूरा मामला जानते हैं.... 
कोर्ट में अभियोजन ने बताया कि वाराणसी में साल 2015 के दौरान गंगा में गणेश प्रतिमा विसर्जन की मांग पर अड़े स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद समेत अन्य लोगों पर लाठीचार्ज हुआ था। इसके विरोध में 5 अक्टूबर, 2015 को मैदागिन स्थित टाउन हाल मैदान से अन्याय प्रतिकार यात्रा निकाली थी। इसमें साधु-संतों ने भी हिस्सा लिया था। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के आगे भी एक जत्था चल रहा था। शाम करीब साढ़े 4 बजे गोदौलिया चौराहे पर खड़ा एक सांड भड़क गया और गिरजाघर चौराहे की ओर भागा। इससे भगदड़ मच गई।

अन्याय प्रतिकार यात्रा के साथ चौक से गोदौलिया की तरफ जा रहे लोग भी भागने लगे। उन्हें लगा कि पुलिस ने यात्रा रोकी है और लाठीचार्ज किया है। मौका पाकर उपद्रवियों ने पहले पुलिस बूथ और फिर एक सरकारी में आग लगा दी। बूथ में लगी आग इतनी भयावह थी कि उसकी लपटों ने ठीक पीछे तांगा स्टैंड को भी अपनी चपेट में ले लिया।

उपद्रवियों ने जमकर बवाल किया था

2015 की प्रतिकार यात्रा के बाद वाराणसी शहर में कई जगह हंगामा और विरोध हुआ था । उपद्रवियों ने मजिस्ट्रेट की जीप, फायर ब्रिगेड की गाड़ी और पुलिस की वैन समेत करीब 24 बाइक आग के हवाले कर दी थीं। गोदौलिया तांगा स्टैंड पर कहीं से दो पेट्रोल बम भी फेंके गए थे। इसके बाद पुलिस ने पहले लाठियां पटकीं, फिर आंसू गैस के गोले और रबड़ बुलेट का इस्तेमाल किया।

हवाई फायरिंग भी हुई। पुलिस ने उपद्रव प्रभावित इलाकों को जाने वाले रास्तों को सील कर दिया। कोतवाली, चौक, दशाश्वमेध, लक्सा और चेतगंज थाना क्षेत्रों में करीब ढाई घंटे का कर्फ्यू लगा दिया गया था। पांच थाना क्षेत्रों में संपूर्ण कर्फ्यू लगाया गया। शहर भर में चौकसी के साथ पुलिस टीमें सख्त और सक्रिय रहीं ।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद व सतुआ बाबा समेत 82 थे नामजद
दशाश्वमेध थाने में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद, सतुआ बाबा, महंत बालक दास, पूर्व विधायक अजय राय, पंकज सिंह उर्फ डब्ल्यू राय, अरुण पाठक, अजय चौबे, अमरनाथ यादव उर्फ डब्बल, असित दास समेत 82 लोगों के खिलाफ पुलिस की ओर से मुकदमा दर्ज कराया गया था। अब 81 आरोपियों का मुकदमा वापस लेने का फैसला लिया गया है।

इस मामले में अविमुक्तेश्वरानंद व सतुआ बाबा के खिलाफ अदालत से वारंट जारी हुआ था। अदालत में पेशी के बाद ही दोनों को राहत मिल सकी थी। मुकदमे के एक अन्य आरोपी कांग्रेस के प्रांतीय अध्यक्ष अजय राय को राहत नहीं मिल सकेगी। सरकार ने अजय राय के आपराधिक इतिहास का हवाला दिया औ मुकदमा वापस न लेने का फैसला किया।

गैरजमानती वारंट समेत कुर्की का हुआ था आदेश शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की के केस की सुनवाई के दौरान वाराणसी MP-MLA कोर्ट ने गैर जमानती वारंट जारी किया था। इसके अलावा उनकी संपत्ति की कुर्की का आदेश पुलिस को दिया था।

कोर्ट ने कहा था कि इस मामले में पुलिस की कार्रवाई की रिपोर्ट ADCP काशी जोन से रिपोर्ट के बाद गिरफ्तारी के लिए आदेश दिया था। हालांकि बाद में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती फरार घोषित होने के कारण MP-MLA कोर्ट में हाजिर हुए थे। जिला जज डॉ. अजय कृष्ण विश्वेश की अदालत में सुनवाई के बाद उनकी जमानत अर्जी मंजूर कर रिहा कर दिया था तब से इस केस की सुनवाई जारी थी ।

अजय राय का केस वापस नहीं लेने पर कांग्रेस ने उठाए सवाल
उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता सीपी राय ने प्रतिकार यात्रा में 81 लोगों को बरी करके अजय राय पर केस चलाने के फैसले पर सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि एक ही घटना और एक ही मुकदमे में दो तरह के फैसले कैसे लिए जा सकते हैं?

सीपी राय ने कहा, यह पूरी तरह से पूर्वाग्रही और अविवेकपूर्ण कार्य है। मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने नैतिकता के खिलाफ जाकर अपने कई मुकदमे और डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के मुकदमे वापस लिए । मंत्री दयाशंकर मिश्र 'दयालू' भी आरोपी थे, मगर उनका भी मुकदमा वापस लिया।

पूरे प्रदेश में भाजपाइयों के 20 हजार से ज्यादा मुकदमे वापस लिए गए। मगर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की बढ़ती लोकप्रियता से घबराए मुख्यमंत्री एक जायज मुकदमा वापस लेने को तैयार नहीं हैं। उन्होंने कहा, हम सरकार से मांग करते हैं कि अविलम्ब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के खिलाफ दायर इस मुकदमे को वापस लिया जाए।

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