यूपी में फंस गए इन भाजपा नेताओं के टिकट : पहली लिस्ट में नहीं आया नंबर, बलिया पर भी फ़िलहाल उम्मीदवार की घोषणा नही

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Lucknow News : लोकसभा चुनाव की घोषणा से ठीक पहले भारतीय जनता पार्टी ने अपने उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी की है। शनिवार को जारी हुई इस लिस्ट में उत्तर प्रदेश समेत देश के एक दर्जन राज्यों की 195 संसदीय सीट शामिल हैं। ख़ास बात यह है कि उत्तर प्रदेश से सबसे ज़्यादा 51 उम्मीदवार भारतीय जनता पार्टी ने घोषित किए हैं। इसके बावजूद बीजेपी ने 23 सीटों से अपने उम्मीदवार घोषित नहीं किए हैं। इस वजह से उत्तर प्रदेश के कई दिग्गज नेताओं के टिकट फंस गए हैं। इनमें वरुण गांधी, मेनका गांधी, ब्रजभूषण शरण सिंह और संतोष गंगवार जैसे नेता शामिल हैं।

संतोष गंगवार और संघमित्रा मौर्य को अभी टिकट नहीं

बरेली में संतोष गंगवार का टिकट घोषित नहीं किया गया है। संतोष गंगवार भारतीय जनता पार्टी के सीनियर लीडर हैं। अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि वह पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के मंत्रिमंडल में पेट्रोलियम मिनिस्टर (स्टेट) थे। बदायूं में संघमित्रा का टिकट फंसा है। संगमित्रा मौर्या को उनके पिता स्वामी प्रसाद मौर्या की वजह से पिछली बार भारतीय जनता पार्टी ने टिकट दिया था। विधानसभा चुनाव से ठीक पहले स्वामी प्रसाद मौर्य भाजपा छोड़कर चले गए थे।

वरुण गांधी और मेनका गांधी के नाम गायब

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पीलीभीत के लिए भी घोषणा नहीं की गई है। यहां से इंदिरा गांधी की छोटी बहू मेनका गांधी सांसद हैं। मेनका गांधी के पुत्र और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के पोते वरुण गांधी का भी टिकट भारतीय जनता पार्टी ने इस सूची में शामिल नहीं किया है। आपको बता दें कि वरुण गांधी सुल्तानपुर से सांसद हैं।

उम्र की सीमा को हेमा मालिनी ने पीछे छोड़ा

संतोष गंगवार 75 वर्ष आयु पूरी कर चुके हैं। वह दावेदारी कर रहे हैं, मगर आयु सीमा आड़े आ रही है। आयु सीमा से परे मथुरा से हेमा मालिनी को टिकट दिया गया है, लेकिन बरेली की घोषणा रोकना समझ से परे है। संघमित्रा मौर्य के पिता स्वामी प्रसाद मौर्य नई पार्टी बना चुके हैं। पिता-पुत्री के अलग छोर की सियासत करने से बदायूं के समीकरण फंस गए हैं। फिलहाल टिकट घोषित नहीं हुआ। पीलीभीत में वरुण गांधी सांसद हैं मगर, इस सीट पर भी प्रत्याशी की घोषणा नहीं हुई है। वह चार वर्ष भाजपा पर हमलावर रहे, फिर भी टिकट की इच्छा में हैं। एक चर्चा यह भी है कि मेनका गांधी को दुबारा पीलीभीत लाया जा सकता है।

अभी यूपी की इन सीटों पर घोषणा का इंतज़ार

उत्तर प्रदेश में 80 संसदीय क्षेत्र हैं। भारतीय जनता पार्टी ने छह सीट अपने गठबंधन साथियों के लिए छोड़ दी हैं। दो सीट राष्ट्रीय लोकदल को दी गई हैं। दो सीट पर अनुप्रिया पटेल का अपना दल लड़ेगा। एक सीट ओमप्रकाश राजभर की पार्टी और एक सीट निषाद पार्टी को दी गई है। बाक़ी 74 सीटों पर भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार चुनाव लड़ेंगे। शनिवार को भाजपा ने 51 उम्मीदवार घोषित कर दिए हैं। अब 23 और उम्मीदवारों की घोषणा बाक़ी रह गई है। जिन सीटों पर उम्मीदवार घोषित नहीं किए गए हैं। उनमें सहारनपुर, मेरठ, बिजनौर, अलीगढ़ और सहारनपुर शामिल हैं। आपको बता दें कि सहारनपुर से भारतीय जनता पार्टी के युवा नेता राघव लखनपाल चुनाव लड़ते हैं। बिजनौर सीट को लेकर भारतीय जनता पार्टी गहन मंथन में हैं। दरअसल, इस सीट पर बहुजन समाज पार्टी का क़ब्ज़ा है। मेरठ में भाजपा के मौजूदा सांसद राजेंद्र अग्रवाल हैं, लेकिन पिछली बार उनकी जीत का मार्जिन बहुत छोटा था। अलीगढ़ से लगातार 2 बार सतीश गौतम चुनाव जीत रहे हैं। सतीश गौतम का भी टिकट घोषित नहीं किया गया है। जबकि, पांचों पड़ोसी सीट गौतमबुद्ध नगर, बुलंदशहर, मथुरा, एटा और इटावा के टिकट घोषित कर दिए गए हैं।

इन सीटों पर अभी प्रत्याशी नहीं उतारे

भाजपा ने मुरादाबाद, हाथरस, फ़िरोज़ाबाद और मैनपुरी संसदीय क्षेत्रों के लिए उम्मीदवारों की घोषणा नहीं की है। मुरादाबाद सीट पर समाजवादी पार्टी के सांसद एसटी हसन की इसी सप्ताह मौत हुई है। मैनपुरी और फ़िरोज़ाबाद समाजवादी पार्टी का गढ़ हैं। लिहाज़ा, यहां भाजपा तोल मोल कर उम्मीदवारों की घोषणा करेगी। पश्चिमी उत्तर प्रदेश की एक और महत्वपूर्ण सीट बदायूं पर उम्मीदवार की घोषणा नहीं की गई है। कांग्रेस परिवार की परंपरागत सीट रायबरेली से भी उम्मीदवार घोषित नहीं किया गया है। कानपुर लोकसभा क्षेत्र से सत्यदेव पचौरी सांसद हैं। कानपुर सीट का उम्मीदवार घोषित नहीं किया गया है। कौशांबी, फूलपुर और इलाहाबाद लोकसभा क्षेत्रों के उम्मीदवार घोषित नहीं किए हैं। इलाहाबाद से रीता बहुगुणा जोशी सांसद हैं। आपको बता दें कि फूलपुर पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की परंपरागत सीट रही है। बहराइच और कैसरगंज सीट से उम्मीदवार घोषित नहीं किए गए हैं। यहां से भाजपा के सांसद बृजभूषण शरण सिंह हैं। बृजभूषण पिछले साल पहलवानों से हुए विवाद के कारण अंतरराष्ट्रीय सुर्खियां में शामिल रहे थे।

पूर्वांचल की कई सीटों को करना पड़ेगा इंतजार

देवरिया और घोसी सीट फ़िलहाल छोड़ दी गई हैं। पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर की सीट बलिया पर भी फ़िलहाल भारतीय जनता पार्टी ने उम्मीदवार की घोषणा नहीं की है। मछली शहर और ग़ाज़ीपुर के उम्मीदवार घोषित करने बाक़ी हैं। पिछले लोकसभा चुनाव में मछली शहर से भाजपा ने केवल 181 वोटों से जीत हासिल की थी। यह देश भर में भाजपा का सबसे छोटा लिंग मार्जिन था। भदोही, रॉबर्ट्सगंज और मिर्ज़ापुर के उम्मीदवार घोषित नहीं हुए हैं।

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