लखनऊ में साइबर क्राइम, सावधान! सोशल मीडिया पर विदेशी महिलाओं की फोटो लगाकर की जाती है ठगी

फेसबुक और इंस्ट्राग्राम में एकाउंट बनाकर विदेशी महिलाओं की फोटो लगाकर लोगों को ठगने का काम किया जा रहा है। यूपी की राजधानी लखनऊ में एक ऐसा ही मामला सामने आया है।

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Short Highlights

  • अपने अकाउंट्स का पासवर्ड नियमित रूप से बदलते रहें। 
  • फ्री गिफ्ट देने का वादा करने वाले कॉल से सतर्क रहें और उन्हें कोई भी जानकारी और ओटीपी न दें। 
  • सोशल मीडिया या इंटरनेट पर किसी भी अनचाहे ई-मेल, एसएमएस या मैसेज में आए अटैचमेंट या लिंक को न खोलें। 
  • घर बैठे कमाई करने जैसे लालच में ना आएं। ऐसे कॉल या विज्ञापन को नजरअंदाज करें। 
  • किसी भी साइबर ठगी से बचने का सबसे आसान रास्ता है, कि आप किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें और भुगतान न करें। 
  • किसी से भी अपनी बैंकिंग डिटेल्स, ओटीपी व एटीएम का पासवर्ड शेयर न करें।

Lucknow News : फेसबुक और इंस्ट्राग्राम में एकाउंट बनाकर विदेशी महिलाओं की फोटो लगाकर लोगों को ठगने का काम किया जा रहा है। यूपी की राजधानी लखनऊ में एक ऐसा ही मामला सामने आया है। एक रिटायर्ड आईईएस ऐसे ही धोखाधड़ी का शिकार होकर 83 लाख रुपये गवां बैठा। यह सारा खेले टेलीग्राम के माध्यम से किया गया। मामला दर्ज होने के बाद साइबर क्राइम विभाग ने इस तरह की ठगी करने वाले गैंग के एक सदस्य को गिरफ्तार कर लिया है। इसमें हैरानी करने वाली बात यह है कि गिरफ्तार किया गया व्यक्ति नाईजीरियन निकला।

नाइजीरियन गैंग द्वारा की जा रही ठगी का पर्दाफाश  

डीसीपी ने बताया कि 22 जनवरी को रिटायर्ड आईईएस द्वारा सूचना दी गई कि साइबर अपराधी द्वारा इंस्टाग्राम, व्हाटसअप, मेल आईडी के माध्यम से एबॉट फार्मास्युटिकल लिमिटेड का अधिकृत अधिकारी बताते हुए कम्पनी की रॉ मटेरियल सप्लायर के लिए रजिष्ट्रेशन कराने और कम्पनी को रॉ मटेरियल को सप्लाई के नाम पर शिकायतकर्ता द्वारा कुल 83 लाख रुपये की ठगी करने सम्बन्धी शिकायत दी गई। जिस पर थाना साइबर क्राइम ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी | जांच के दौरान इसमें एक नाइजीरियन गैंग का नाम सामने आया। जिनकी गिरफ्तारी करते हुए शनिवार को कार्रवाई पूरी की गई। पकड़े गए अभियुक्त का अपराधिक इतिहास है उसपर 2021 का एक मुकदमा दिल्ली में क्राइम ब्रांच टीम द्वारा दर्ज की गई थी। इस दौरान अभियुक्त के कब्जे से लैपटाप और मोबाइल बरामद किया गया था। अभियुक्त द्वारा ठगी के पैसों को पांच खातों में आरटीजीएस के माध्यम से स्थानान्तरित कराये गए थे। 

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दोस्ती करने के बाद फिर बिजनेस करने का देता था लालच 

उन्होंने बताया कि पूछताछ के दौरान अभियुक्त ने बताया कि साइबर अपराधियों द्वारा विदेशी महिला के नाम और फोटो का इस्तेमाल कर इंस्टाग्राम, फेसबुक आदि सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर एकाउन्ट बनाया जाता है और उनके द्वारा वरिष्ठ नागरिकों व व्यक्तियों से दोस्ती कर इन्वेस्टमेंट, बिजनेस आदि चीजों के लिए झांसे में लेकर अपने अन्य सहयोगियों के साथ ट्रैप कर बड़ी धनराशि की ठगी की जाती है। अभियुक्त के कब्जे से एक लैपटॉप एचपी, दस मोबाइल फोन, 213 सिम, एक पासपोर्ट, दो डेबिड कार्ड, एक डीएल, एक मेंबरशिप कार्ड और 6370 रुपये नकद बरामद किया है। 

टेलीग्राम पर कुछ इस प्रकार से की जा रही ठगी 

साइबर सेल प्रभारी सतीश साहू ने बताया कि टेलीग्राम यूजर के पास कई अनजान संदेश आते हैं। ठग यूट्यूब चैनल को सब्सक्राइब करने के लिए पैसे कमाने का प्रलोभन देते हैं। सब्सक्राइब करने पर पैसा देने का दावा होता है। यूजर भी प्रलोभन में आ जाता है और सब्सक्राइब करता है। उसे वर्चुअल खाते में पैसे मिलते हैं। ये एक तरफ से साफ्टवेयर बनाया जाता है फिर उसे निकालने के लिए या अधिक पैसे कमाने के लिए एक टेलीग्राम से जुड़ने के लिए कहा जाता है। टेलीग्राम से जुड़ते ही उसमें कई लोगों का मैसेज दिखता है। इसमें केवल फायदा होने की बात कही जाती है। मुनाफा देखकर लोग झांसे में आ जाते हैं। जैसे ही इस वर्चुअल वालेट में पैसे डाला जाता है, उसके बाद रकम बढ़कर दिखाई देने लगती है। इससे महसूस होता है कि लगाया हुआ पैसा बढ़ रहा है। उसे जब निकालने का प्रयास करते हैं, तो वह पैसा लाक हो जाता है। इसके बाद यूजर की पर्सनल जानकारी हासिल कर उसके खाते से पैसे निकाल लिए जाते हैं।

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