एवरेस्ट फतह करने वाले आईएएस अफसर रविंद्र सिंह बने बरेली के नए डीएम, जानें क्यों छोड़ी मर्चेंट नेवी की नौकरी

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Bareilly News: उत्तर प्रदेश में बरेली के जिलाधिकारी शिवाकांत द्विवेदी 31 अक्टूबर को सेवानिवृत्त हो रहे हैं. इससे पहले उन्हें रिटायरमेंट से जुड़ी विभागीय प्रक्रिया पूरी करने के लिए मुख्यालय बुला लिया गया है. शिवाकांत द्विवेदी को विधानसभा चुनाव के दौरान निर्वाचन आयोग ने भेजा था. उन्होंने बरेली को काफी बेहतर ढंग से चलाया. मगर, अब बरेली की कमान झांसी के डीएम रहे रविंद्र कुमार को सौंपी गई है. 2011 बैच के आईएएस अफसर रविंद्र कुमार बुलंदशहर में भी डीएम रह चुके हैं. उन्होंने कई जिलों में एसडीएम, डीएम, आयुक्त मनोरंजन कर सहित विभिन्न पदों पर काम किया है. भारत सरकार में केंद्रीय पेयजल, और स्वच्छता मंत्री, उमा भारती के निजी सचिव के रूप में दिसंबर 2017, से 14 जून 2019 तक काम किया.

किसान परिवार में हुआ जन्म

आईएएस अधिकारी रवींद्र कुमार का जन्म बिहार के बेगूसराय जिले के चेरिया बरियारपुर प्रखंड के बसही गांव के किसान परिवार में वर्ष 1981 में हुआ था. वह बचपन से ही शिक्षा में मेधावी रहे. उन्होंने गांव के एक ग्रामीण हिंदी माध्यम स्कूल में प्रारंभिक पढ़ाई की. इसके बाद उन्होंने अपनी 10वीं तक की पढ़ाई जवाहर नवोदय विद्यालय, बेगूसराय में की. इसके बाद जवाहर विद्या मंदिर रांची से 12वीं की शिक्षा पूरी की. उन्होंने 1999 में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) प्रवेश परीक्षा भी पास की. लेकिन, शिपिंग को करियर के रूप में लेने का फैसला किया और मर्चेंट नेवी में शामिल हो गए.

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रवींद्र कुमार ने 2002 से 2008 तक मर्चेंट नेवी में काम किया. इसके बाद उन्होंने 2009 में नौकरी छोड़ दी. फिर सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी के लिए नई दिल्ली आ गए. यूपीएससी एग्जाम में पास होने के बाद उन्हें कैडर के रूप में सिक्किम राज्य दिया गया था. यहां उन्होंने अगस्त 2013 से फरवरी 2014 तक दक्षिण सिक्किम के नामची उप-मंडल के एसडीएम के रूप में राज्य में काम किया. इसके बाद जून 2014 में ग्रामीण विकास, पंचायती राज, पेयजल और स्वच्छता राज्य मंत्री के साथ काम करने के लिए नई दिल्ली आए. मई 2016 में उनके कैडर को सिक्किम से उत्तर प्रदेश में स्थानांतरित कर दिया गया.

दो बार की एवरेस्ट पर चढ़ाई, लोगों की बचाई जान

सिक्किम में पदस्थापन के दौरान रविंद्र कठिन प्रशिक्षण, दृढ़ निश्चय, सकारात्मक सोच के बल पर पहले ही प्रयास में 19 मई 2013 को विश्व के सबसे ऊंचे शिखर एवरेस्ट पर पहुंचे थे. इसके बाद 2015 में एवरेस्ट पर उन्होंने दूसरी बार चढ़ाई की. उनका उद्देश्य ‘स्वच्छ भारत अभियान’ के बारे में जागरूकता फैलाना था. उनको प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने झंडी भी दिखाई थी. उस अभियान के दौरान उन्होंने 25 अप्रैल 2015 को भूकंप और हिमस्खलन के बाद एवरेस्ट बेस कैंप में खुद को खतरे में डालते हुए कई लोगों की जान बचाई.

कई पुस्तक लिखीं और मिले पुरुस्कार

आईएएस अफसर रविंद्र कुमार ने अपनी पर्वतारोहण की यात्रा पर दो प्रेरक पुस्तक भी लिखी थीं. यह ब्लूम्सबरी द्वारा प्रकाशित की. 'मैनी एवरेस्ट-एन इंस्पायरिंग जर्नी ऑफ ट्रांसफॉर्मिंग ड्रीम्स इनटू रियलिटी' (Many Everest: An Inspiring Journey of Transforming Dreams into Reality) और इसके हिंदी संस्करण 'एवरेस्ट, सपनों की उड़ान, सिफर से शिखर तक' नामक पुस्तक लिखीं. 'एडवांस पॉजिटिव विज़ुअलाइजेशन' नामक सफलता के लिए एक अभिनव तकनीक के बारे में बात करती है. यह भाषण, श्रवण, गंध, स्पर्श आदि जैसी किसी भी अन्य संवेदी धारणा से पहले किसी भी चीज की छवि को पकड़ने के लिए मानव मस्तिष्क की सहज शक्ति का उपयोग करता है.

लेखक वैज्ञानिक रूप से अपनी तकनीक को पाठकों को समझाता है और व्यावहारिक रूप से प्रदर्शित करता है और उन्हें प्रेरित करने की कोशिश करता है कि वह कैसे एक बेसहारा पृष्ठभूमि से आने और जीवन में कई बाधाओं का सामना करने के बावजूद कम समय में कई मील के पत्थर स्थापित किए. ये दोनों पुस्तकें युवकों के लिए बहुत ही प्रेरक सिद्ध हो रही हैं. उनके अनुकरणीय कार्यों के लिए, श्री कुमार को 'सिक्किम खेल रत्न पुरस्कार', बिहार में विशेष खेल सम्मान, कुश्ती रत्न पुरस्कार, सेलर टुडे सी, शोर पुरस्कार, समुद्र मंथन पुरस्कार सम्मान, जयमंगला काबर पुरस्कार, अटल मिथिला सम्मान, भारत गौरव पुरस्कार सहित कई पुरस्कार और मान्यताएं प्राप्त हुई हैं.

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