Ballia News: बलिया में ऐतिहासिक होगा हिंदी पत्रकारिता दिवस 200वां साल, यह स्कूल करेगा मेजबानी

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बलिया न्यूज : पत्रकारों के हितों के लिए पूरे जोश के साथ लड़ने और हर सुख-दुख में उनके साथ खड़े रहने वाले भारतीय राष्ट्रीय पत्रकार महासंघ बलिया ने हिन्दी पत्रकारिता दिवस पर मंगलवार को भव्य समारोह का आयोजन किया.

बलिया न्यूज : पत्रकारों के हितों के लिए पूरे जोश के साथ लड़ने और हर सुख-दुख में उनके साथ खड़े रहने वाले भारतीय राष्ट्रीय पत्रकार महासंघ बलिया ने हिन्दी पत्रकारिता दिवस पर मंगलवार को भव्य समारोह का आयोजन किया. सनबीम स्कूल अगरसंडा के सभागार में आयोजित समारोह में जिले के दर्जनों प्रमुख पत्रकारों का सम्मान किया गया.

संगोष्ठी में जिले के पत्रकारों सहित विभिन्न क्षेत्रों के लोगों ने पत्रकारिता को वर्तमान परिवेश में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने को कहा। इस दौरान पत्रकारों के सामने आने वाली चुनौतियों पर भी चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा कि पत्रकारों ने अपने लेखन के माध्यम से लोगों को न्याय दिलाने के लिए जो काम किया है, उसे भुलाया नहीं जा सकता है। वरिष्ठ पत्रकार विनय जी ने कहा कि उदंत मार्तंड की शुरुआत पंडित युगल किशोर ने 1826 में की थी, जब अंग्रेजी अखबारों या क्षेत्रीय भाषा के अखबारों का बोलबाला था। उस समय हिंदी में समाचार पत्र प्रकाशित करना कोलकाता के दृढ़ इच्छाशक्ति वाले व्यक्ति के बस की बात नहीं थी। हिंदी को गैर-भाषी क्षेत्र में स्थान दिलाने के पंडित युगल किशोर के सफल प्रयास की जितनी भी तारीफ की जाए।

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वरिष्ठ पत्रकार अजीत ओझा ने पत्रकारों में एकता पर बल दिया। कहा कि आप अकेले अपनी कलम से निरंकुश नौकरशाहों का मुकाबला नहीं कर सकते। मैं स्वयं आपके सामने अत्याचारी नौकरशाही का शिकार हूं, जिसे आप लोगों की एकता से ही जेल से बाहर लाया गया। मेरा जिले के सभी पत्रकार मित्रों से अनुरोध है कि व्यक्तिगत मतभेद होने पर भी एकता को कमजोर न होने दें। वरिष्ठ पत्रकार नरेंद्र मिश्रा ने कहा कि पत्रकारों को एक जगह उपस्थित देखकर खुशी होती है. ऐसे कार्यक्रम होते रहना चाहिए। श्री मिश्रा ने हिंदी पत्रकारिता दिवस के अवसर पर संगोष्ठी आयोजित करने के लिए आयोजक मधुसूदन सिंह एवं सनबीम स्कूल के निदेशक डॉ. कुंवर अरुण सिंह गामा का आभार व्यक्त किया. कहा कि आज के नए पत्रकारों के लिए समय-समय पर प्रशिक्षण कार्यशाला भी आयोजित की जानी चाहिए।

वरिष्ठ पत्रकार शशिकांत ओझा ने कहा कि पत्रकारिता के क्षेत्र को व्यवसाय बनाने से पत्रकारों के सामने चुनौतियां खड़ी हो गई हैं. पत्रकार न चाहते हुए भी निष्पक्ष पत्रकारिता करने में असहज महसूस कर रहा है। इसके बावजूद आज निष्पक्ष पत्रकारिता कम हुई है, समाप्त नहीं हुई है। नेशनल जर्नलिस्ट फेडरेशन ऑफ इंडिया के प्रांतीय कार्यकारिणी सदस्य संतोष शर्मा ने ग्रामीण पत्रकारों को पत्रकारिता के दौरान आने वाली चुनौतियों और वरिष्ठ मुख्यालय स्तर के पत्रकारों से अपेक्षित सहयोग नहीं मिलने पर नाराजगी व्यक्त की. कहा कि इस कमी को दूर करना बेहद जरूरी है। प्रांतीय कार्यकारिणी सदस्य डॉ. सुनील कुमार ओझा ने उदीयमान पत्रकारों के प्रशिक्षण के लिए कार्यशाला आयोजित करने पर बल दिया. आयोजन संस्था के प्रांतीय प्रधान महासचिव मधुसूदन सिंह ने सभी वक्ताओं के सुझावों पर अपनी सहमति जताते हुए आश्वासन दिया कि पत्रकारों के हित में संगठन हमेशा खड़ा रहेगा.

हिंदी पत्रकारिता के 200वें वर्ष को ऐतिहासिक बनाने के लिए अभी से पहल की जानी चाहिए, ताकि

संगोष्ठी को संबोधित करते हुए सनबीम स्कूल के निदेशक डॉ. कुंवर अरुण कुमार सिंह ने कहा कि सच्ची पत्रकारिता करने वालों को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है. इसके बावजूद वे निष्पक्ष तरीके से खबरों को अंजाम देते हैं। ऐसे कलमकारों के कारण आज भी लोग तानाशाही व्यवस्था चलाने से डरते हैं। कहा कि वर्तमान परिवेश में पत्रकारिता के क्षेत्र में गिरावट आई है, लेकिन लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कही जाने वाली पत्रकारिता पर आज भी लोगों का भरोसा है। कहा कि 2026 में हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष पूरे होंगे, उस वर्ष बलिया में एक भव्य आयोजन किया जाए, जो हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्षों के सफर को वर्तमान पीढ़ी के समक्ष प्रस्तुत करते हुए हिंदी पत्रकारिता के संघर्षों को चित्रित करे। सनबीम स्कूल इस कार्यक्रम का आयोजन कर गौरवान्वित महसूस करेगा। कहा कि आज सोशल मीडिया या इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का दौर कितना भी चल रहा हो, आज भी लोग पूरी खबर के लिए अखबार का इंतजार करते हैं।

उनकी उपस्थिति

इस अवसर पर राणा प्रताप सिंह, ओमप्रकाश राय, संजीव सिंह, सुनील सेन, जमाल आलम, विनोद गुप्ता, एजाज, दिनेश गुप्ता, शब्बीर अहमद, नवल जी, विवेक पटेल आदि मौजूद रहे। अध्यक्षता अशोक कुमार सिंह व संचालन रविप्रकाश सिन्हा ने किया।

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