Karwa Chauth पर 100 साल बाद बन रहा महासंयोग : जानें शुभ मुहूर्त, पौराणिक इतिहास, महत्व, कथा, मंत्र तथा वैवाहिक जीवन को और खुशहाल बनाने की विधि

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Karwa Chauth : करवा चौथ व्रत कार्तिक कृष्ण चतुर्थी तिथि को है। इस दिन सुहागन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। ज्योतिष गुरू पंडित अतुल शास्त्री से जानते हैं कि करवा चौथ पूजा मुहूर्त, चंद्र अर्घ्य समय और पारण कब होगा ?  

करवा चौथ का व्रत हर साल कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को रखा जाता है। उस दिन कार्तिक संकष्टी चतुर्थी होती है, जिसे वक्रतुंड संकष्टी चतुर्थी कहते हैं। करवा चौथ के दिन सुहागन महिलाएं और विवाह योग्य युवतियां अपने जीवनसाथी की लंबी आयु और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। इस व्रत में चंद्रमा की पूजा करना और अर्घ्य देना जरूरी है। इसके बिना करवा चौथ का व्रत पूरा नहीं होता है।

ज्योतिष गुरू पंडित अतुल शास्त्री बताते है कि इस बार कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि 31 अक्टूबर दिन मंगलवार को रात 09 बजकर 30 मिनट से प्रारंभ हो रही है। य​ह तिथि 01 नवंबर बुधवार को रात 09 बजकर 19 मिनट पर खत्म होगी। उदयातिथि और चतुर्थी के चंद्रोदय के आधार पर करवा चौथ व्रत 1 नवंबर बुधवार को रखा जाएगा। इस दिन व्रती को 13 घंटे 42 मिनट तक निर्जला व्रत रखना होगा। व्रत सुबह 06 बजकर 33 मिनट से रात 08 बजकर 15 मिनट तक होगा।

इस साल करवा चौथ के दिन 100 साल के बाद एक महासंयोग बन रहा है। दरअसल, 100 साल के बाद मंगल और बुध एक साथ विराजमान होंगे, उसकी वजह से बुध आदित्य योग बन रहा है, जो बहुत ही शुभ माना जाता है। इतना ही नहीं, करवा चौथ के दिन शिव योग और सर्वार्थ सिद्धि योग भी बन रहा है। यह योग सुबह 7:34 से लेकर सुबह 9:13 तक रहेगा। करवा चौथ की महिमा हिंदू धर्म में बहुत मानी जाती है।

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ज्योतिष गुरू पंडित अतुल शास्त्री के अनुसार यह व्रत सबसे पहले शक्ति स्वरूपा देवी पार्वती ने भगवान भोलेनाथ के लिए रखा था। इसके अलावा कहा जाता है कि द्रौपदी ने भी पांडवों को संकट से मुक्ति दिलाने के लिए करवा चौथ का व्रत रखा था। करवा चौथ का व्रत विवाह के 16 या 17 सालों तक करना अनिवार्य होता है। करवा चौथ का व्रत कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को किया जाता है।

मान्यता है कि, जो कोई भी सुहागिन स्त्री इस व्रत को करती है, उनके पति की उम्र लंबी होती है। उनका गृहस्थ जीवन अच्छा रहता है। साथ ही उनके पति की सेहत भी अच्छी रहती है। इसके अलावा कुंवारी कन्याएं भी करवा चौथ के व्रत को कर सकती हैं, जिससे उन्हें मनचाहे वर की प्राप्ति हो सकती है।

ज्योतिष गुरू पंडित अतुल शास्त्री बताते है कि आपसी प्रेम और विश्वास को बढ़ाने या बरकरार रखने के लिए एक रेशमी कपड़े में पचास ग्राम पीली सरसों और 2 गोमती चक्र डालें। इसमें एक छोटे से सफेद कागज पर अपने पति का नाम लिख दें। दूसरे कागज पर अपना लिखें‌। कपड़े में ये कागज को भी रखकर अच्छी तरह से बांध दें। इसे वहां रख दें, जहां किसी की भी नजर पूरे साल ना पड़े। इस पोटली को अगले साल करवा चौथ पर ही खोलें। ऐसा करने से आपका दांपत्य जीवन मजबूत होगा। विश्वास और प्रेम बढ़ेगा।

करवा चौथ के दिन अपनी शादीशुदा जिंदगी में आई किसी भी समस्या को दूर करने के लिए गाय को 5 केले, बेसन के 5 लड्डू और 5 पेड़े खिलाएं। अपनी समस्या को दूर करने के लिए गाय की पीठ सहलाएं और प्रार्थना करें। इससे आपके वैवाहिक जीवन में मौजूद कोई भी परेशानी कम हो जाएगी। आपसी प्रेम और विश्वास भी बढ़ेगा। इस दिन गणेश भगवान की पूजा करने के साथ ही सिद्धिविनायक के मंत्र जपें। इससे आपकी जिंदगी में खुशियां भर जाएंगी। शादीशुदा जीवन मजबूत बना रहेगा।

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