अशांत हिंद महासागर क्षेत्र

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हिंद महासागर क्षेत्र अशांत हो गया है, पश्चिम एशिया में युद्ध की गूंज भारत के आसपास के जल क्षेत्रों में भी देखने को मिल रही है जिसमें व्यापारिक जहाजों पर हमलों में वृद्धि और जहाजों के अपहरण का प्रयास भी शामिल है। माना जा रहा है कि गाजा में इजराइल के सैन्य हमलों के जवाब में मालवाहक जहाजों पर हमले किए जा रहे हैं।

समुद्री डकैती, गाजा युद्ध और बढ़ती चीनी शक्ति नौसेना की क्षमताओं को बढ़ा रही है। भारत को अपने भू-राजनीतिक हितों की रक्षा करने और चीन की बढ़ती आक्रामकता का मुकाबला करने के लिए अपनी नौसैनिक क्षमताओं को बढ़ाने की आवश्यकता है। ध्यान रहे हूती विद्रोहियों द्वारा निशाना बनाए गए जहाजों की सहायता करने या छोटे जहाजों के अपहरण को रोकने के लिए भारतीय नौसेना को बार-बार बुलाया गया है।

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रक्षा राज्य मंत्री अजय भट्ट ने शुक्रवार को लोकसभा में बताया कि भारतीय नौसेना की इकाइयां जिबूती, अदन की खाड़ी और सोमालिया के पूर्वी तट में तैनात की जा रहीं हैं। पिछले दिनों नौसेना के जहाज सुमित्रा ने सोमालिया के पूर्वी तट पर समुद्री डकैती के खिलाफ एक और सफल अभियान को अंजाम दिया है।

भारतीय नौसेना ने मछली पकड़ने वाले जहाज अल नामी और उसके चालक दल को सोमालियाई समुद्री लुटेरों से बचाया है। इससे पहले  भारतीय नौसेना के युद्धपोत आईएनएस सुमित्रा ने सोमाली समुद्री डाकुओं द्वारा अपहृत मछुआरों को बचाया था। समुद्री डाकुओं ने ईरानी जहाज का अपहरण कर लिया था।

अब समय आ गया है कि भारत अपनी नौसैनिक क्षमताओं में बढ़ोतरी के साथ व्यापारिक बेड़े के निर्माण की आवश्यकता पर बारीकी से विचार करे। इसके लिए उन्नत प्रौद्योगिकी और विशेषज्ञता तक पहुंच हासिल करने के लिए जहाज निर्माण के बुनियादी ढांचे और साझेदारी को बढ़ाने की आवश्यकता होगी। हालांकि भारत विदेशी सहयोगियों की मदद से समुद्री विमान और वाहक हासिल करने के लिए  युद्ध स्तर पर काम कर रहा है।

एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत के पास वर्तमान में 132 युद्धपोत, 143 विमान और 130 हेलीकॉप्टर हैं। देश ने अब 2 लाख करोड़ रुपये के 68 युद्धपोतों और जहाजों का ऑर्डर दिया है। आने वाले वर्षों में, भारत को स्वदेशी रूप से तैयार किए गए नौसैनिक उपकरणों में से आठ कार्वेट, नौ पनडुब्बियां और पांच सर्वेक्षण जहाज भी हासिल करने की बात कही जा रही है। भारत निर्माण की धीमी गति, पुराने जहाजों के तेजी से सेवामुक्त होने और बजट की कमी से भी त्रस्त है।

क्षेत्रीय जल क्षेत्र में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच चीन की ताकत का बढ़ना तय है। ऐसे में समुद्री क्षेत्र में भविष्य की चुनौतियों से पार पाने के लिए भारत को अपने विदेशी भागीदारों से मजबूत समर्थन की आवश्यकता होगी।

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