खेती में जोखिम

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प्रकृति पर निर्भरता के कारण खेती में जोखिम और अनिश्चितताएं आम हैं। सूखा, बाढ़, बेमौसम बरसात और ओलावृष्टि आदि सीधे खेती को प्रभावित करते हैं। ऐसी परिस्थितियों में फसलों का बीमा करना प्रमुख रणनीति मानी जाती है। फसल बीमा किसानों को फसल के नुकसान की स्थिति में भुगतान के माध्यम से जोखिम से निपटने में मदद करता है और कृषि क्षेत्र मंे आपदा भुगतान पर बोझ को कम करके सरकार की मदद करता है।

किसानों की समस्याओं पर ध्यान देते हुए सरकार ने वर्ष 2016 में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई) शुरू की थी। जिसका उद्देश्य कम पैदावार या पैदावार के नष्ट हो जाने की स्थिति में किसानों को मदद मुहैया कराना था। सरकार द्वारा किए गए प्रयासों के कारण, योजना के तहत कवरेज साल-दर-साल बढ़ रही है।

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गुरुवार को जारी आंकड़ों के अनुसार पीएमएफबीवाई के कार्यान्वयन के पिछले 8 वर्षों में 56.80 करोड़ किसानों के आवेदन पंजीकृत किए गए हैं और 23.22 करोड़ से अधिक किसान आवेदकों को दावे प्राप्त हुए हैं। इस दौरान किसानों ने प्रीमियम के अपने हिस्से के रूप में लगभग 31,139 करोड़ रुपये चुकता किए, जिसके आधार पर उन्हें 1,55,977 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान दावे के रूप में किया गया।

यह योजना खासकर उन किसानों का बोझ कम करने में मदद कर रही है, जो खेती के लिए ऋण लेते थे और खराब मौसम में फसल बर्बादी के कारण उसी ऋण को चुका पाने में असमर्थ रहते थे। इसके बावजूद देश में फसल बीमा को किसानों के बीच ज्यादा लोकप्रियता नहीं मिली है। इसका कारण यह है कि अधिकांश राज्यों द्वारा उनके प्रीमियम सब्सिडी शेयर का समय पर भुगतान नहीं कराया जाता है। 

गौरतलब है कि भारतीय फसल बीमा ‘क्षेत्र दृष्टिकोण’ पर काम करता है। क्षेत्रीय दृष्टिकोण तभी अच्छा काम करता है जब किसानों की उपज और फसल काटने के प्रयोगों में उपज के बीच सहसंबंध अधिक हों। इस शर्त को शायद ही कभी पूरा किया जाता है जिसके परिणामस्वरूप ‘बुनियादी जोखिम’ होता है, यानी, किसान को फसल का नुकसान होता है लेकिन मुआवजा नहीं मिलता है।

इसके अलावा, उन लोगों के लिए जिन्हें अंततः मुआवजा मिलता है, अधिकांश मामलों में भुगतान में काफी देरी होती है। कई बदलावों के बाद पीएमएफबीवाई शुरू की गई, जो पहले की समान योजनाओं का एक उन्नत संस्करण है। हालांकि कई मुद्दे और चुनौतियां हैं, अत: इस योजना के उद्देश्य की पूर्ति हेतु सरकार को योजना के समक्ष आने वाली उपरोक्त सभी चुनौतियों के संबंध में जल्द-से-जल्द समाधान का रास्ता तलाशना चाहिए। 

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