देश की मजबूती के लिए

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राष्ट्र की मजबूती के लिए उसका रक्षा क्षेत्र में मजबूत होना बहुत जरूरी होता है। इस क्षेत्र में आत्मनिर्भरता उसे और मजबूत करती है। एक समय भारत रक्षा क्षेत्र की हर छोटी-बड़ी जरूरतों के लिए दूसरे देशों पर निर्भर था। इस मोर्चे पर भारत की स्थिति धीरे-धीरे बदल रही है। भारत रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से बढ़ रहा है।

2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के सपने को लेकर आगे बढ़ रहा है। गौरतलब है कि जैसे-जैसे देश की अर्थव्यवस्था वैश्विक स्तर पर मजबूत हो रही है,भारत रक्षा क्षेत्र के लिए जरूरी सामानों के आयात को कम कर रहा है और उसके लिए ‘मेक इन इंडिया’अभियान के तहत घरेलू बुनियादी ढांचे के निर्माण पर जोर दे रहा है। रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने के लिए भारत सरकार ने कुछ वर्षों में कई नीतिगत पहल की हैं। इसके तहत रक्षा उपकरणों के स्वदेशी डिजाइन,विकास और निर्माण को प्रोत्साहित करने के लिए सुधार किए गए हैं। इससे देश में रक्षा विनिर्माण और प्रौद्योगिकी में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिला है।

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रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देकर केंद्र सरकार सेना को स्वदेशी हथियारों और उपकरणों से लैस करने के लिए अभियानरत है। स्वदेशी उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ रक्षा खरीद पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। 

इसी महत्वाकांक्षी पहल को आगे बढ़ाते हुए सोमवार को डिफकनेक्ट 2024 का आयोजन किया जा रहा है जिसका उद्घाटन रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह करेंगे। डिफकनेक्ट 2.0 कार्यक्रम देश की सेना को मजबूत करेगा। देश के रक्षा नवाचार परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है,जो सशस्त्र बलों,रक्षा उद्योग के प्रमुख उद्यमियों,स्टार्ट-अप,शिक्षाविदों और नीति निर्माताओं सहित सभी महत्वपूर्ण हितधारकों को एक साथ लाता है।

विशेषज्ञों के मुताबिक आयोजन का उद्देश्य सार्थक जुड़ाव को बढ़ावा देना, अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों का प्रदर्शन करना और रक्षा क्षेत्र में सहयोग, नवाचार एवं उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए एक परिवर्तनकारी मंच प्रदान करना है। पहल का उद्देश्य डिफेंस स्टार्टअप्स के साथ नियमित रूप से जुड़ने की रणनीति को जारी रखना है। यह अवसर स्टार्टअप्स के लिए निवेश प्राप्त करने और भविष्य के परिचालनों का नेतृत्व करने को लेकर लाभ उठाने के लिए है।

दुनिया में बहुत सी चीजें भारत को प्रभावित कर रही हैं। भारत के पास इस विश्व व्यवस्था में बदलाव के बीच खुद को मजबूत करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। इसलिए सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए महत्वपूर्ण है कि हम अपनी रक्षा, शांति और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए मजबूत बनें।

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