एआई के दुरुपयोग पर चिंता

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दुनिया में सभी देश और समाज कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) से उत्पन्न होने वाले नए खतरों तथा जोखिमों को लेकर जागरूक हो रहे हैं। कई देशों में एआई से संबंधित जोखिमों को कम करने से संबंधित बहुत सारी गतिविधियां हुई हैं। एक विनियमन है और यूरोपीय संघ में एक कानून पारित किया गया है। अमेरिका ने एक कार्यकारी आदेश पारित किया है। 

वैश्विक स्तर पर संयुक्त राष्ट्र ने एआई के बारे में विचार-विमर्श करने के लिए एक अलग निकाय की स्थापना की है। क्योंकि एआई से उत्पन्न जोखिमों और खतरों से निपटने के लिए वैश्विक स्तर के सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं। एआई एक कंप्यूटर या कंप्यूटर द्वारा नियंत्रित रोबोट की उन कार्यों को करने की क्षमता है जो आमतौर पर मनुष्यों द्वारा किए जाते हैं, क्योंकि उन्हें मानव बुद्धि और निर्णय की आवश्यकता होती है। 

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हालांकि कोई भी एआई उन विविध प्रकार के कार्यों को नहीं कर सकता है जो एक सामान्य मानव कर सकता है, कुछ एआई विशिष्ट कार्यों में मनुष्यों की बराबरी कर सकते हैं। बुधवार को ग्लोबल इंडिया एआई शिखर सम्मेलन में सूचना प्रौद्योगिकी एवं इलेक्ट्रानिक्स मंत्री अश्विनी वैष्णव ने हाल के चुनाव में एआई के दुरूपयोग पर चिंता जताते हुए कहा कि शीघ्र ही एआई को लेकर मिशन को शुरू किया जाएगा। 

आने वाले कुछ महीनों में मिशन शुरू हो जाएगा ताकि कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, चिकित्सा, फार्मास्यूटिकल्स और इन सभी क्षेत्रों में एआई की शक्ति और क्षमता का दोहन किया जा सके। गौरतलब है कि मंत्रिमंडल ने इस वर्ष मार्च में ‘इंडिया एआई मिशन’ के लिए 10,300 करोड़ रुपये से अधिक के आवंटन को मंजूरी दी थी। इंडिया एआई मिशन भारत के एआई पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। 

अगले पांच वर्षों में निर्धारित यह पर्याप्त वित्तीय निवेश इंडिया एआई मिशन के विभिन्न घटकों को उत्प्रेरित करने के लिए तैयार है, जिसमें इंडिया एआई कंप्यूटर क्षमता, इंडिया एआई इनोवेशन सेंटर (आईएआईसी), इंडिया एआई डेटासेट प्लेटफॉर्म, इंडिया एआई एप्लिकेशन डेवलपमेंट इनिशिएटिव, इंडिया एआई फ्यूचरस्किल्स, इंडिया एआई स्टार्टअप फाइनेंसिंग और सुरक्षित एवं विश्वसनीय एआई जैसी महत्वपूर्ण पहल शामिल हैं। 

भारत एआई मिशन के व्यापक दृष्टिकोण के अनुरूप, इन पहलों का उद्देश्य एआई में भारत के वैश्विक नेतृत्व को मजबूत करना, तकनीकी आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना, नैतिक और जिम्मेदार एआई परिनियोजन सुनिश्चित करना और समाज के सभी वर्गों में एआई के लाभों का लोकतंत्रीकरण करना है। भारत नागरिकों के लाभ और अर्थव्यवस्था के विस्तार के लिए एआई की शक्ति का पूरा उपयोग करने जा रहा है। यानि एआई भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिए गतिज प्रवर्तक बनने जा रहा है।

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