नई सरकार की चुनौतियां

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प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी ने तीसरी पारी की शुरुआत की है। तीसरी बार शपथ लेने के बाद नई सरकार का पहला निर्णय किसान कल्याण के बारे में सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। सोमवार को प्रधानमंत्री ने किसान निधि की 17 वीं किस्त जारी की। इससे 9.3 करोड़ किसानों को लाभ होगा और उनमें लगभग 20,000 करोड़ रुपये वितरित किए जाएंगे। बेहतर होगा कि नई सरकार मध्यम वर्ग के लिए भी कुछ करे। 

इस राह पर दो बड़ी चुनौतियां खड़ी हैं जिनकी अनदेखी करते हुए आगे बढ़ना मुमकिन नहीं है। ये हैं बेरोजगारी और असमानता। इंटरनेशनल लेबर ऑर्गनाइजेशन की इंडिया एम्प्लॉयमेंट रिपोर्ट के मुताबिक देश में 80 प्रतिशत बेरोजगार युवा हैं। जहां तक असमानता की बात है तो उसे अक्सर तेज विकास के आगे ज्यादा ध्यान नहीं दिया जाता,लेकिन याद रखने की बात है कि तेज विकास को अगर टिकाऊ बनाना हो तो असमानता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। 

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प्रधानमंत्री मोदी ने अगले दशक के लिए सुशासन,समग्र विकास और आम आदमी की जिंदगी में सुधार के लक्ष्य तय किए हैं,लेकिन कुछ विरोधाभास ऐसे हैं कि सुशासन के लिए जरूरी आर्थिक नीतियां प्रभावित हो सकती हैं। सरकार को कथित तौर पर बांटने वाले राजनीतिक मुद्दों से दूरी बनाए रखते हुए विकास के एजेंडे पर पूरा ध्यान केंद्रित करना होगा। 

नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने कहा कि राजग सरकार को अपने तीसरे कार्यकाल में देश में बेरोजगारी की समस्या से निपटना होगा,खासकर असंगठित क्षेत्र और लघु एवं मध्यम उद्यमों में। सरकार को अब चार श्रम संहिताओं को अंतिम रूप देना चाहिए,क्योंकि इसमें अपेक्षा से अधिक देरी हो चुकी है। 

अमेरिका-भारत व्यापार परिषद (यूएसआईबीसी) के अध्यक्ष अतुल केशप ने कहा कि नरेंद्र मोदी का लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री के रूप में शपथ लेना बढ़ती भू-रणनीतिक अनिश्चितता के बीच राजनीतिक व आर्थिक स्थिरता का एक मजबूत संदेश देता है। साथ ही भारतीय उद्योग जगत ने उम्मीद जताई कि नई सरकार विकसित भारत के लिए सुधारों के अगले चरण की शुरुआत कर सकती है। आने वाले दिनों में तय की गई बुनियादी प्राथमिकताओं पर काम करने के नई सरकार को राज्यों के सहयोग की आवश्यकता होगी। 

इससे विकास संबंधी नतीजों में बेहतरी आएगी। कुल मिलाकर अगले पांच सालों में बेहतर नीतिगत नतीजे हासिल करने के लिए अहम है कि संसद को समुचित ढंग से काम करने दिया जाए। जैसा कि प्रधानमंत्री ने कहा है कि उन्हें 18 वीं लोकसभा में ज्यादा चर्चाओं की उम्मीद है। ऐसे में यह सरकार का दायित्व होगा कि वह विपक्ष के साथ सकारात्मक संबंध बनाए तथा बेहतर विधायी परिणाम हासिल करे।

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